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Showing posts from March, 2020

विश्व व्यापार संगठन।World trade organisation-WTO.

विश्व व्यापार संगठन।World trade organisation-WTO. GATT का पूरा नाम: ---GENERAL AGREEMENT ON TRADE AND TARIFF. GATT की स्थापना कब हुई? 1947 में। WTO की स्थापना कब हुई? 1 january 1995 में gatt के उत्तराधिकारी के रूप में।ध्यान दीजिए कि GATT के उरुग्वे सम्मेलन में ही WTO के निर्माण की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी। विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक के पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला कौन हैं? एन्गोज़ी ओकोंजो-इवेला विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक के पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला  हैं।यह नाइजीरिया की निवासी हैं। WTO की स्थापना जिस समझौते के तहत हुई उस समझौते को किस नाम से जाना जाता है? WTO की स्थापना जिस समझौते के तहत हुई उस समझौते को मारकेश समझौते के नाम से जाना जाता है।ऐसा इसलिये क्योंकि WTO के स्थापना के लिए मोरक्को के मारकेश में हस्ताक्षर किए गए। WTO का  मुख्यालय कहाँ है? WTO का  मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा में स्थित है। "WTO भले ही एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है लेकिन यह देशों के मध्य होने वाले व्यापारिक नियमों को विनियमित नही करता है।" कथन सही है या गलत? कथन गलत है।WTO एक अंतरर

मूर्तिकला की शैली।

गंधार,मथुरा तथा अमरावती  शैली मूर्ति कला की तीन शैली हैं। तीनो शैली में बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण किया गया है।इनमे अंतर क्या है?   इन तीनों शैलियों में अंतर है।    जैसे:-मथुरा और अमरावती की मूर्ति शैली देशी है परंतु गंधार शैली विदेशी प्रभाव से प्रभावित है।इस पर यूनानियों का प्रभाव है।     इनके निर्माण में प्रयुक्त पत्थरों में भी अंतर है। मथुरा शैली के मूर्ति का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से हुआ है। अमरावती शैली के मूर्ति का निर्माण सफेद संगमरमर से हुआ है। जबकि गंधार शैली के मूर्ति निर्माण में नीले धूसर बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया।बाद में गंधार शैली में मिट्टी और प्लास्टर का उपयोग किया गया। मथुरा और गंधार शैली को कुषाणों ने संरक्षण दिया क्योंकि ये दोनों ही क्षेत्र उतर भारत के कुषाणों के अंतर्गत आते थे जबकि अमरावती शैली को सातवाहनों का संरक्षण प्राप्त था। मथुरा शैली की मूर्तियां जैन,बौद्ध तथा हिन्दू धर्मो से संबंधित हैं। अमरावती शैली मुख्य रूप से बौद्ध धर्म से संबंधित है। गंधार शैली भी बौद्ध धर्म से ही संबंधित है साथ ही इसपर ग्रीक रोमन देवताओं का भी प्रभाव है। ये तीनो ही शैली मौर्योत्तर

जनपद और महाजनपद upsc.Janpad and mahajanpad.

महाजनपद बना कैसे?  उतर वैदिक काल मे लोहे का उपयोग होने से कृषि के क्षेत्र में बहुत विकास हुआ। लोग एक स्थान पर संगठित होकर कृषि कार्य करने लगे।ध्यान देने योग्य बात है कि वैदिक काल मे कृषि के बजाय पशुपालन जीविका का मुख्य स्रोत था। जन आर्यो को कहा जाता था तथा पद का मतलब पैर होता है। अतः आर्यो के रहने के स्थान को ही जनपद कहा जाता था। जनपद एक तरह से उस काल मे राज्य होते थे।कुल 22 जनपद थे जो कालांतर में संगठित होकर 16 महाजनपद बन गए। संक्षेप में कहा जा सकता है उतर वैदिक काल के बाद के समय मे आर्थिक और राजनीतिक रूप से शसक्त समूह ने ही जनपद और बाद में महाजनपद का रूप धारण कर लिया। महाजनपदों के बारे में हमे जानकारी कैसे मिलती है? महाजनपदों के बारे में हमे जानकारी बौद्ध तथा जैन ग्रंथो से मिलती है। बौद्ध धर्म के अंगुत्तर निकाय और जैन धर्म के भगवती सुत्र से हमे 16 महाजनपदों की जानकारी मिलती है। महाजनपदों का स्थान तथा काल क्या था? महाजनपदों का स्थान उतर भारत था।मुख्यतः विंध्य श्रेणी के उत्तर में । महाजनपद काल 600 ईसवी पूर्व का था।अर्थात हड़प्पा सभ्यता(2350-1750)ईसवी पूर्व,वैदिक काल (1500-1000)ईसवी पूर्